Friday, February 23, 2018

भगवान शिव ने तोड़ा कुबेर का अभिमान

धन के देवता कुबेर को अपने धन और समृद्धि पर अभिमान हो गया। उन्होंने अपने धन और समृद्धि का बखान करने के लिए सभी देवताओं को दावत पर आमंत्रित करने का मन बनाया। कुबेर ने सोचा कि सभी देवताओं पर उनका अच्छा प्रभाव जमेगा। सभी को लगेगा कि कुबेर जैसा कोई नहीं है।

 उन्होंने कैलाश पर्वत पहुंचकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। भगवान शिव कुबेर के संरक्षक है। उन्होंने ही कुबेर को उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया था कि उनकी संपत्ति कभी कम नहीं होगी, भले ही कितना ही खर्च करते रहें। भगवान शिव समझ गए कि कुबेर अभिमानी हो गए हैं।

भगवान शिव ने कुबेर से कहा कि वह दावत में नहीं आ सकते। वह अपने पुत्र श्रीगणेश को भेज देंगे। कुबेर निराश होकर वापस लौट गए। कुबेर सोचने लगे कि अगर भगवान शिव मेरे महल में आते तो मेरी प्रतिष्ठा बढ़ जाती। अगर भगवान शिव के परिवार से कोई भी दावत में नहीं आएंगे तो मेरा दावत करने का उद्देश्य ही सफल नहीं होगा।

कुबेर ने भव्य आयोजन किया था। सभी देवताओंं को दावत से पहले विशाल सभागार में सम्मान के साथ बैठाया गया। कुबेर ने अपनी संपत्ति और धन को दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। मुख्य अतिथि श्री गणेश सबसे बाद में पहुंचे। कुबेर ने उनका स्वागत किया।

श्री गणेश ने कुबेर से पूछा, भोजन कहां है। कुछ ही देर में उनके समक्ष भोजन परोसा गया। श्री गणेश ने सारा भोजन तुरंत खा लिया। उन्होंने अधिक भोजन की मांग की। देखते ही देखते उन्होंने दावत के लिए तैयार सारा भोजन ग्रहण कर लिया। इसके बाद भी श्री गणेश ने और भोजन की मांग की। उन्होंने कहा, कुबेर मेरी भूख शांत नहीं हो रही है। कृपया और भोजन परोसो। कुबेर ने अपने सभी सेवकों को भोजन बनाने में लगा दिया, लेकिन श्री गणेश की भूख शांत नहीं हो रही थी।

श्री गणेश कह रहे थे, मुझे और भोजन दो। वह स्वयं ही रसोईघर में पहुंच गए और वहां रखा सारा राशन खा गए। यह देखकर कुबेर के होश उड़ गए। उनके पास अन्य मेहमानों की दावत के लिए राशन नहीं बचा था। श्री गणेश को अभी भी भूख लग रही थी।

श्री गणेश ने कुबेर ने कहा, तुम्हारे यहां भोजन नहीं है। मैं अपने घर जा रहा हूं। कुबेर ने उनको कुछ देर रुकने को कहा कि मैं अभी और भोजन का प्रबंध कर देता हूं, लेकिन श्री गणेश तो कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। वह अपने घर कैलाश पर्वत की ओर चले गए।

उनके पीछे-पीछे कुबेर भी अपने वाहन से कैलाश पर्वत पहुंच गए। कैलाश पर्वत पर श्री गणेश ने भगवान शिव से शिकायत की कि कुबेर की दावत में भोजन की कमी थी। वह भूखे रह गए। इस पर शिव भगवान ने कहा कि जाओ अपनी माता से कुछ खाने के लिए मांगो। मुझे यकीन है कि कुबेर ने दावत में बेहतर इंतजाम किए होंगे।

श्री शिव के दरबार में पेश होते हुए कुबेर ने कहा, भगवान मैंने दावत में अपनी ओर से सभी बेहतर इंतजाम किए थे। श्री गणेश कुछ देर रुक जाते तो उनके लिए और भोजन का प्रबंध कर देता। कुबेर की बात सुनकर भगवान शिव मुस्कराने लगे। भगवान शिव को मुस्कराते देखकर कुबेर को लगा कि भगवान नाराज नहीं हैं। राहत पाकर कुबेर ने भगवान शिव के चरण पकड़ लिए। कुबेर ने कहा, भगवान मुझे माफ कर दो। मैं अब कभी अपने धन और संपदा को लेकर अभिमान नहीं करुंगा।


Saturday, February 3, 2018

आज वह खुश है जिंदगी से

आपसे एक घटना शेयर करना चाहता हूं, जो मुझे उस समय अचानक याद आ गई, जब मैंने उस युवा को चौक बाजार में अपना व्यवसाय करते हुए देखा। वह जब भी मिलता है, हमेशा आभार जताता है, उस रात उसकी और मेरी बातचीत के सकारात्मक निष्कर्ष का। उस समय वह 18-20 साल का होगा। 

रात के करीब दो बजे होंगे, मैं ड्यूटी से लौट रहा था। घर से पहले रेलवे क्रासिंग के पास मुझे वह मिल गया, जिसका जिक्र मैंने अभी किया था। फाटक बंद था और किसी ट्रेन या मालगाड़ी ने आना था। 
मैंने उससे पूछा, यहां क्या कर रहे हो। उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैं उसको पहले से जानता था, इसलिए उसके इस व्यवहार पर मुझे कुछ शक हुआ। 

मैंने फिर पूछा, भाई यहां क्या कर रहे हो, घर जाओ। क्या बात हो गई। तुम्हें पहले कभी इतनी रात को सड़क पर नहीं देखा। क्या बात है, मुझे बताओ। कोई दिक्कत है तो खुलकर बात करो। मैं तब तक यहां से नहीं जाने वाला, जब तक कि यह पता नहीं चल जाता कि तुम यहां क्यों खड़े हो। मैंने उसे समझाने की कोशिश की, अगर किसी विश्वास के व्यक्ति को अपनी समस्या बता देते हैं, तो समाधान हो जाता है या कोई न कोई रास्ता निकल आता है। 

काफी कुरेदने पर उसने मुझे समस्या तो नहीं बताई, पर इतना जरूर कहा, मैं अब जिंदा नहीं रहना चाहता। बहुत दुखी हो गया हूं। उसकी बात से मुझे यह समझते देर नहीं लगी कि वह यहां फाटक पर क्या करने आया है। मैंने तय कर लिया कि कुछ भी हो जाए, इसको पहले घर छोड़ा जाए। 

मैंने उसे यह समझाने की कोशिश करने लगा कि अगर वह जिंदा नहीं रहेगा तो क्या समस्या भी खत्म हो जाएगी। समस्या तो बनी रहेगी और यह ज्यादा बढ़ जाएगी। फिर यह तुम्हारे परिवार को और ज्यादा परेशान करेगी। दोस्त, ऐसी कोई दिक्कत नहीं है, जो दूर नहीं हो सकती। हर समस्या का समाधान है। 

काफी समझाने के बाद वह घर चलने को राजी हो गया। उसको उसके घर ले गया। वह अपनी नानी के पास रह रहा था। पता चला कि वह चुपचाप घर से निकला था। तब तक ट्रेन या मालगाड़ी भी क्रासिंग से आगे बढ़ चुकी थी। 

यहां इस घटना का जिक्र करने का उद्देश्य यह बताना नहीं है कि मैंने कोई बड़ा काम कर दिया। मैं तो केवल यह बताने की कोशिश कर रहा हूं कि जो बात आपको ज्यादा परेशान कर रही है, उसका जिक्र उस व्यक्ति के साथ जरूर करें, जिसे अपने ज्यादा करीब और विश्वस्त मानते हैं। समस्याओं को लेकर घुटते रहने से कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा। अपनी बात जरूर शेयर करें, फिर तय मानिए समाधान निकलेगा। 

केदारघाटी के गांवों में बच्चों से मुलाकात

तकधिनाधिन की टीम कहीं जाए और बच्चों से मुलाकात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। हम तो हमेशा तैयार हैं बच्चों से बातें करने के लिए। उनकी कहानिया...